सोमवार, 15 दिसंबर 2025

Which foods spoil when refrigerated and why? कौन से खाद्य पदार्थ प्रशीतन से खराब होते हैं और क्यों?

 

Which foods spoil when refrigerated and why?

कौन से खाद्य पदार्थ प्रशीतन से खराब होते हैं और क्यों?

 

कुछ खाद्य पदार्थ प्रशीतन (refrigeration) के लाभ नहीं उठा पाते हैं; विशेषज्ञों का कहना है कि वे खराब हो सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ठंडी हवा नमी पैदा करती है, जो बैक्टीरिया के विकास में सहायता करती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं या यहाँ तक कि फूड पॉइजनिंग भी हो सकती है।

निम्नलिखित खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें फ्रिज में रखने से बचने की सलाह दी जाती है और उसके कारण:

1. टमाटर (Tomatoes)

फ्रिज में रखने से टमाटर का स्वाद, बनावट (texture), और फ्लेवर प्रभावित होता है।

रेफ्रिजरेटर का ठंडा तापमान पकने के लिए जिम्मेदार एंजाइमों को रोकता है, जिससे उनकी स्थिरता गूदेदार (mealy consistency) हो जाती है और स्वाद फीका पड़ जाता है।

2. ब्रेड (Bread)

ठंडी और नम जलवायु ब्रेड को बासी, सख्त, सूखा और चबाने योग्य (chewy) बनावट में बदल देती है।

फ्रिज का ठंडा और नम वातावरण स्टार्च रेट्रोग्रेडेशन (starch retrogradation) या क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया को बहुत तेज़ी से बढ़ा देता है, जिससे ब्रेड कमरे के तापमान की तुलना में बहुत तेजी से बासी हो जाती है।

ठंडी हवा फ्रिज की अन्य गंधों को अवशोषित करके इसके स्वाद को भी खराब कर देती है।

3. अदरक (Ginger)

फ्रिज का ठंडा, आर्द्र (humid) वातावरण अदरक को ठंडी, सूखी पेंट्री में रखने की तुलना में जल्दी नरम, फफूंदीयुक्त (moldy) या चिपचिपा (slimy) बना सकता है।

नमी सड़न को प्रोत्साहित करती है, खासकर अगर अदरक धोया गया हो।

4. पका हुआ चावल (Cooked Rice)

चावल को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसमें बैसिलस सेरेअस (#Bacillus cereus) नामक बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है।

इस बैक्टीरिया के बीजाणु (#spores) खाना पकाने से बच जाते हैं और कमरे के तापमान पर बचे हुए चावल में विषाक्त पदार्थ (#toxins) पैदा कर सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग होती है और उल्टी तथा दस्त जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं।

(हालांकि, स्रोत यह भी बताता है कि इसे स्टोर करने का तरीका महत्वपूर्ण हैइसे दो घंटे के भीतर जल्दी से ठंडा करें और तीन दिनों के भीतर तुरंत फ्रिज में रखें)

5. कच्चे आलू (Raw Potatoes)

ठंडे तापमान से आलू में मौजूद स्टार्च, शर्करा (sugars) में बदल जाता है।

यह रूपांतरण आलू के स्वाद, बनावट और रंग को प्रभावित करता हैवे पकाए जाने पर काले पड़ जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, शर्करा में इस रूपांतरण के कारण उच्च-तापमान पर पकाने के दौरान एक्रिलामाइड (acrylamide) का निर्माण बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए एक संभावित चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ फ्रिज में रखने पर जहरीले और हानिकारक बन जाते हैं या अपने पोषक तत्व भी खो देते हैं।

आलू प्रशीतन से क्या प्रभाव डालता है?

प्रशीतन टमाटर को कैसे प्रभावित करता है?

आलू को कभी भी कच्चे रूप में प्रशीतित (#refrigerate) नहीं करना चाहिए।

प्रशीतन (refrigeration) से आलू पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:

1. स्टार्च का शर्करा में रूपांतरण: ठंडा तापमान आलू में मौजूद स्टार्च को शर्करा (sugars) में बदल देता है।

2. स्वाद और बनावट पर प्रभाव: शर्करा में यह रूपांतरण आलू के स्वाद, बनावट (#texture), और रंग को प्रभावित करता है।

3. रंग में बदलाव: ठंडा करने के बाद पकाने पर आलू काले पड़ जाते हैं।

4. स्वास्थ्य संबंधी चिंता: विशेषज्ञों के अनुसार, शर्करा में इस रूपांतरण के कारण उच्च-तापमान पर पकाने के दौरान एक्रिलामाइड (#acrylamide) का निर्माण बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए एक संभावित चिंता का विषय है।

डॉक्टरों की सलाह है कि आलू को स्टोर करने का सबसे अच्छा तरीका किसी ठंडी, अँधेरी और सूखी जगह, जैसे कि पैंट्री, में रखना है।

ब्रेड को बासी बनाने वाली क्रिया को स्टार्च रेट्रोग्रेडेशन (starch #retrogradation) या क्रिस्टलीकरण (#crystallization) कहा जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि फ्रिज का ठंडा और नम वातावरण इस प्रक्रिया को बहुत तेज़ी से बढ़ा देता है। इसी कारण ब्रेड कमरे के तापमान पर रखने की तुलना में फ्रिज में बहुत जल्दी बासी, सख्त, सूखी और चबाने योग्य (#chewy) बन जाती है।

इसके अलावा, ठंडी हवा फ्रिज की अन्य गंधों को अवशोषित करके ब्रेड के स्वाद को भी खराब कर देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रेफ्रिजरेटर की ठंडी हवा नमी (#moisture) पैदा करती है, जो बैक्टीरिया के विकास में सहायता करती है। बैक्टीरिया का यह विकास पाचन संबंधी समस्याओं और यहाँ तक कि खाद्य विषाक्तता (food poisoning) का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कुछ रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थ प्रशीतन (refrigeration) के बाद विषैले (toxic) और हानिकारक (harmful) हो जाते हैं या अपने पोषक तत्व भी खो देते हैं।

उदाहरण के लिए:

1. जीवाणु विकास (Bacterial Growth): ठंडी, नम हवा अदरक को जल्दी नरम, फफूंदीयुक्त (moldy) या चिपचिपा (slimy) बना सकती है, क्योंकि नमी सड़न को बढ़ावा देती है।

2. विषाक्त पदार्थों का निर्माण (Toxin Formation): कच्चे आलू को फ्रिज में रखने से स्टार्च शर्करा में बदल जाता है, और जब इन आलू को उच्च तापमान पर पकाया जाता है, तो इस रूपांतरण के कारण एक्रिलामाइड (acrylamide) का निर्माण बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए एक संभावित चिंता का विषय है।

3. विषाक्तता का गलत प्रबंधन: हालांकि पके हुए चावल में खाद्य विषाक्तता बैसिलस सेरेअस (Bacillus cereus) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है, जो कमरे के तापमान पर विषाक्त पदार्थ (toxins) पैदा कर सकता है, स्रोतों में यह बताया गया है कि यह विषाक्तता तब होती है जब चावल को ठीक से संग्रहीत नहीं किया जाता हैजैसे कि इसे दो घंटे के भीतर जल्दी से ठंडा करना और शीघ्रता से फ्रिज में रखना।

पके हुए चावल को खराब करने वाला जीवाणु (bacteria) बैसिलस सेरेअस (Bacillus cereus) है।

इस जीवाणु के बीजाणु (spores) खाना पकाने की प्रक्रिया से बच जाते हैं और जब बचे हुए चावल को कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाता है, तो वे विषाक्त पदार्थ (toxins) पैदा कर सकते हैं। ये विषाक्त पदार्थ खाद्य विषाक्तता (food poisoning) का कारण बनते हैं, जिससे उल्टी और दस्त जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं।

हालांकि, चावल को फ्रिज में रखने की सलाह दी जाती है, इसे स्टोर करने का तरीका महत्वपूर्ण हैइसे दो घंटे के भीतर जल्दी से ठंडा करना और तीन दिनों के भीतर तुरंत फ्रिज में रखना चाहिए, तथा बैक्टीरिया को मारने के लिए इसे अच्छी तरह से दोबारा गर्म करना चाहिए।

आलू का मंड (starches) ठंडे तापमान के कारण शर्करा (sugars) में बदल जाता है।

स्टार्च का शर्करा में यह रूपांतरण आलू के स्वाद, बनावट (texture), और रंग को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शर्करा में इस रूपांतरण के कारण आलू को उच्च तापमान पर पकाने के दौरान एक्रिलामाइड (acrylamide) नामक एक पदार्थ का निर्माण बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए एक संभावित चिंता का विषय है। इस रूपांतरण के कारण आलू पकाए जाने पर काले भी पड़ जाते हैं।

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

लहसुन के दैनिक सेवन के समर्थन में वैज्ञानिक और आहार संबंधी प्रमाण क्या हैं?

चंकी पांडे के लहसुन अनुष्ठान के स्वास्थ्य लाभ और संभावित जोखिम क्या हैं?


चंकी पांडे के लहसुन अनुष्ठान के स्वास्थ्य लाभ और संभावित जोखिम क्या हैं?




यह स्रोत अभिनेता चंकी पांडे के सुबह लहसुन खाने के अनोखे अनुष्ठान पर केंद्रित है, जिसे वह अच्छे स्वास्थ्य का रहस्य मानते हैं। स्रोत में बताया गया है कि पांडे रोज़ाना दो लहसुन की कलियाँ खाते हैं, हालाँकि इससे उनकी साँसें खराब हो जाती हैं। आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लहसुन का सेवन कोलेस्ट्रॉल कम करने, धमनियों के स्वास्थ्य में सुधार करने, और रक्तचाप को नियंत्रित करने जैसे कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। हालांकि, इसमें अत्यधिक लहसुन के सेवन से जुड़े संभावित जोखिमों पर भी चर्चा की गई है, जैसे कि पेट में परेशानी और खून को पतला करने वाली दवाओं पर लोगों के लिए रक्तस्राव का बढ़ता जोखिम। अंततः, सलाह दी जाती है कि सर्वोत्तम लाभ के लिए लहसुन को संतुलित आहार के हिस्से के रूप में लिया जाए और स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श किया जाए।

चंकी पांडे के लहसुन अनुष्ठान के स्वास्थ्य लाभ और संभावित जोखिम क्या हैं?

चंकी पांडे रोज़ सुबह दो लहसुन की कलियाँ खाते हैं। वह इस अनुष्ठान को अच्छे स्वास्थ्य का मंत्र मानते हैं और उनका कहना है कि यह रक्त और धमनियों के लिए अच्छा है।
इस लहसुन अनुष्ठान के स्वास्थ्य लाभ और संभावित जोखिम निम्नलिखित स्रोतों के अनुसार हैं:
स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits)
डॉ. अंजलि तिवारी के अनुसार, सुबह दो लहसुन की कलियों का सेवन संतुलित आहार के लिए फायदेमंद हो सकता है। लहसुन में एलिसिन, सल्फर और एंटीऑक्सिडेंट जैसे बायोएक्टिव यौगिक प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो इसके कई स्वास्थ्य लाभों में योगदान करते हैं।
1. हृदय स्वास्थ्य (Heart Health): नियमित रूप से लहसुन का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने, और धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोककर समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है।
2. प्रतिरक्षा प्रणाली और संक्रमण
 (Immunity and Infections): लहसुन में प्राकृतिक रोगाणुरोधी (antimicrobial) और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली का प्रभावी ढंग से समर्थन करते हैं और संक्रमण से लड़ते हैं। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में भी कार्य करता है।
3. रक्तचाप नियंत्रण (Blood Pressure Regulation): अध्ययनों से पता चलता है कि लहसुन का सेवन इसके वाहिकाविस्फारक (vasodilatory) प्रभावों के कारण रक्तचाप को विनियमित करने में मदद कर सकता है।
4. क्रोनिक रोगों की रोकथाम (Prevention of Chronic Diseases):
 लहसुन में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट मुक्त कणों को बेअसर करने में भूमिका निभाते हैं, जिससे कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थितियों जैसे क्रोनिक रोगों के जोखिम को कम करने की संभावना होती है। यह कैंसर की रोकथाम में सहायक हो सकता है।
5. अन्य लाभ (Other Benefits): यह यकृत रोगों (liver diseases) के जोखिम को कम करने में सहायता करता है, और इसके सल्फर यौगिक शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है।
संभावित जोखिम और दुष्प्रभाव (Potential Risks and Side Effects)
चंकी पांडे स्वयं उल्लेख करते हैं कि इस अनुष्ठान के कारण उनकी साँस बहुत खराब हो जाती है। डॉ. तिवारी ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक लहसुन के सेवन से अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं:
1. पाचन संबंधी समस्याएँ (Digestive Issues): अत्यधिक सेवन से जठरांत्र संबंधी बेचैनी (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिस्कम्फर्ट), पेट फूलना (bloating), और खराब साँस हो सकती है।
2. रक्तस्राव का जोखिम (Risk of Bleeding): लहसुन में रक्त को पतला करने वाले गुण होते हैं, इसलिए एंटीकोआगुलेंट दवाएँ लेने वाले लोगों को अत्यधिक लहसुन के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि यह रक्तस्राव के जोखिम को बढ़ा सकता है।
3. पेट की परत में जलन (Stomach Lining Irritation): कच्चा लहसुन पेट की परत में जलन पैदा कर सकता है, खासकर उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें एसिड रिफ्लक्स या अल्सर की समस्या है।
महत्वपूर्ण सलाह
अधिकतम लाभ के लिए, ताज़े लहसुन का सेवन करने और इसे किसी एकल उपचार के बजाय एक सुव्यवस्थित आहार के हिस्से के रूप में शामिल करने की सलाह दी जाती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह विशिष्ट चिकित्सा स्थितियों या आहार आवश्यकताओं को पूरा करता है, हमेशा एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना उचित है।


गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

A Silent Heart Attack-साइलेंट हार्ट अटैक के बढ़ते चलन पर...

 यह लेख साइलेंट हार्ट अटैक की बढ़ती घटनाओं पर गहराई से चर्चा करता है, विशेष रूप से युवाओं के बीच इसके तेजी से फैलते खतरे पर ध्यान केंद्रित करते हुए। सामान्य धारणा यह है कि दिल का दौरा हमेशा तेज़ सीने के दर्द के साथ आता है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि कई बार यह हमला बिना किसी स्पष्ट दर्द के भी हो सकता है। यही कारण है कि इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है—जहाँ शरीर संकेत तो देता है, पर हम उन्हें अनदेखा कर देते हैं।



लेख में डॉ. शर्ली कोह, जो एक प्रसिद्ध कार्यात्मक चिकित्सा विशेषज्ञ हैं, इस समस्या के सूक्ष्म लेकिन खतरनाक लक्षणों के बारे में चेतावनी देती हैं। उनके अनुसार, मतली और उल्टी होना, बिना कारण ठंडा पसीना आना, चक्कर या हल्कापन महसूस करना, अचानक सांस फूलना, और शरीर के ऊपरी हिस्सों—जैसे पीठ, बाजू, गर्दन या जबड़े—में हल्का सा दर्द भी दिल के दौरे का संकेत हो सकता है। अक्सर लोग इन लक्षणों को गैस, कमजोरी, तनाव या थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन डॉक्टर कोह बताती हैं कि यही लापरवाही जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

डॉ. कोह यह भी उल्लेख करती हैं कि यूके में उपलब्ध एक नई तीव्र रक्त परीक्षण किट पारंपरिक परीक्षणों की तुलना में कहीं अधिक जल्दी और सटीकता से बता सकती है कि दिल का दौरा पड़ा है या नहीं। ऐसे उपकरण समय पर उपचार शुरू करने में बड़ी मदद कर सकते हैं, खासकर तब जब लक्षण साफ़ न हों।

लेख का प्रमुख उद्देश्य पाठकों में जागरूकता फैलाना है—ताकि लोग यह समझ सकें कि हार्ट अटैक केवल सीने के दर्द तक सीमित नहीं है। शरीर द्वारा भेजे जा रहे इन छोटे संकेतों को गंभीरता से लेना, तुरंत चिकित्सा सलाह लेना, और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना न केवल बीमारी से बचा सकता है बल्कि समय रहते जान भी बचा सकता है। हृदय स्वास्थ्य के प्रति यही सतर्कता आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।