क्या आपने यह जानने का प्रयत्न किया है कि आप के आस -पास के लोग वही सब कर रहे होते हैं जो दूसरे लोग करते हैं 1
अब आप कहोगे कि 'हाँ ठीक ही तो कर रहे हैं ! हम सब वही करेंगे जो दूसरे लोग कर करते, जैसे कि हम सब रोज़ी -रोटी कमाने के लिए बाहर जाते हैं कोई काम करते हैं १'
आप सही सोच रहे हो, परन्तु मेरा कहने का तातपर्य यह नहीं है १
मेरा इशारा आप सब का ध्यान उन कार्यों, आदतों या बातो की ओर आकर्षित करना है जो लोग देखा देखी करते है बिना अपने विवेक का प्रयोग किये१
इसी कारण से वे अपने व्यक्तित्व को दूसरों के व्यक्तित्व में उलझा देते हैं १
लोग धूम्रपान करते हैं, क्या आप भी धूम्रपान इसलिए करोगे कि दूसरे लोग ऐसा कर रहे हैं?
लोग नशा करते हैं, परन्तु आप भी यह कार्य बिना किसी सोच-विचार के करोगे क्या?
लोग अपना पैसा व्यर्थ में लूटा रहे होते हैं ...क्या आप भी ऐसा करोगे?
मुझे पूरा विश्वाश है की आप ऐसा नहीं करोगे १
धूम्रपान हानिकारक है १ नशा करना एक बुरी लत है १ व्यर्थ में पैसा लुटाना एक बेवकूफी है १
अब मैं आप की प्रतिकिर्या जानना चाहूंगा निम्न लिखित बिन्दुओं पर:
१. जब आप का कोई प्यारा मित्र या आपके घर में आपकी पत्नी आपको कहती है:
"आप अपने ऑफिस का काम घर पर क्यों करते हो? क्या आप को खन्ना साहब से अधिक सेलरी मिलती है?"
"आप तो बस ऐसे ही ईमानदारी की चक्की में पिसते रहोगे, जबकि तुम्हारे साथ वाले कहीं से कहीं पहुँच गए हैं १"
"सत्यवान जी, झूठ बोलना सीखिये अगर इस दुनियां में जीना है १"
"आप कभी घर में पार्टी अरेंज कर लिया करो"
क्या आप ऊपर लिखे सुझाओं पर अमल करना पसंद करोगे जब कि आपकी अंतरात्मा आपको ऐसा करने से रोक रही हो १
आप के घर का बजट यदि आप को फालतू खर्च करने कि आज्ञा नहीं दे रहा है तो क्या आप अपनी बीवी या अपने पति को ठीक से समझा पाओगे कि ऐसा करना आपके अहित में है!
दोस्तों वह कार्य बिलकुल न कीजिये जिस को करने के पश्चात आपको पछताना पड़े १
दूसरों की सलाह लीजिये, परन्तु कीजिये अपनी अन्तआत्मा के अनुसार १
ऐसा करने के पश्चात अगर आपको पछताना भी पड़े तो आप यह नहीं कहोगे कि यदि 'मैं' उसकी बात न मानता तो अच्छा होता १
अपने फैसले पर आपको किसी और को दोषी बनाने कि आवश्यकता नहीं होगी १
आप सदैव ध्यान रखिये कि आप आप हैं और वो वो हैं 1
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